सीहोर। भगवती शिवशक्ति मंदिर महिला मंडल द्वारा गल्ला मण्डी पुलिस लाइन स्थित मंदिर परिसर में आयोजित भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को भागवताचार्य पंडित रविशंकर तिवारी ने शिव पार्वती विवाह नरसिंह अवतार प्रसंग प्रस्तुत किया। कथा में गुरूवार को श्रीरामजन्म,श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
पंडित रविशंकर तिवारी ने श्रद्धालुओं के समक्ष कहा कि तपस्या विद्या गुरूजनों के वरादान से राजा दक्ष श्रेष्ठ हो गया था किंतू दक्ष महाराज का पद मिलने से वह बड़ा अभिमानी अहंकारी हो गया था। वह विनम्र नहीं था विकार उत्पन्न हो गए थे। राजा दक्ष ने महायज्ञ किया सभी देवताओं को आमंत्रित किया किंतू अपने जमाई भगवान शंकर को आमंत्रित नहीं किया। कहते है कि विद्या वही श्रेष्ठ है जो विकार मिटा दें और पद वही श्रेष्ठ है जो विनम्र बना दें। महादेव के मना करने के बाद भी बिना आमंत्रण के माता सती दक्ष महाराज के महायज्ञ में चली गई थी वह पर सभी देवताओं के बैठने के लिए स्थान था किंतू महादेव के लिए कोई स्थान नहीं था भगवान शंकर का दक्ष ने घौर अपमान किया माता सती को भी बिना बुलाए आने पर अपमानित किया और माता सती महायज्ञ के हवन कुंड में ही भष्म हो गई। इस लिए जहां जाने से पति मना करें तो वह पत्नि को नहीं जाना चाहिए।
तिवारी ने कहा जीवन में सभी को मान सम्मान देना चाहिए प्रणाम का महत्व है। राजा दक्ष की सभा में पहुचे ब्रह्मा विष्णु सहित सभी देवताओं ने उन्हे प्रणाम किया लेकिन महोदव ने अपने स्वाभाव के कारण दक्ष को नमस्कार नहीं किया जिस कारण राजा दक्ष को अपमान जैसा लगा क्योंकी महादेव दक्ष के जमाई भी है आगे घटनाक्रम में माता सती के पिता राजा दक्ष के द्वारा पति शंकर के प्रति अपमान करने से माता को सती होना पड़ा था। इस लिए सभी के सम्मान का ध्यान रखे। पढ़ लिख करके बड़े अफसर बड़े अधिकारी बन जाएं और किसी छोटे को कुछ ना समझे तो आपकी विद्या केवल विडंबना मात्र है विनय जिसमें आ जाए उसी की विद्या श्रेष्ठ है। उन्होने कहा कि गरीब की शादी में जाना हो तो आप आपकी हैसियत से लिफाफा नहीं देते गरीब की हैसियत से लिफाफा देते हैं और किसी अमीर के यहा जाते हो तो अपने हिसाब लिफाफा देते है लेकिन अब किसी गरीब के जाओ तो बड़े से बड़ा लिफाफा दो उसकी बेटी के विवाह में कुछ काम आ जाए।

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