आजीविका मिशन से श्रीमती रचना दीदी के सशक्तिकरण की प्रेरणादायी कहानी गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में राष्ट्र स्तरीय कार्यक्रम विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगी श्रीमती रचना दीदी अपनी मेहनत और लगन से श्रीमती रचना दीदी बनीं महिलाओं के लिए प्रेरणा


सीहोर, 24 जनवरी, 2026    सीहोर जिले की आष्टा तहसील के ग्राम ग्वाली निवासी श्रीमती रचना दीदी का जीवन स्वयं सहायता समूह से जुडने से पहले एक साधारण गृहिणी के रूप में चल रहा था। वे अपने परिवार की देखभाल में व्यस्त रहती थीं, जबकि उनके पति श्री बाबुलाल सिलाई का काम करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। बाबूलाल की आय का आधा हिस्सा घर चलाने में चला जाता था, और बाकी बचत से वे अपने परिवार की अन्य जरूरतों को पूरा करते थे। इसके अलावा, बाबुलाल के पास थोड़ी कृषि योग्य भूमि है, जिसमें वे खेती का काम भी करते है। श्रीमती रचना और बाबुलाल ने हमेशा मेहनत और ईमानदारी से अपने परिवार की देखभाल की। हालांकि, वे समझ चुके थे कि जीवन की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए कुछ अतिरिक्त करने की आवश्यकता है। यह वह समय था जब रचना ने अपने जीवन में बदलाव लाने के बारे में सोचना शुरू किया।

  श्रीमती रचना के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने ग्राम आजीविका स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ने का निर्णय लिया। 01 दिसंबर 2019 को उन्होंने समूह में शामिल होकर अपनी बचत और आर्थिक सुरक्षा की दिशा में पहला कदम उठाया। उन्होंने समूह में बचत जमा करना शुरू किया, जिससे उन्हें बचत की आदत लगी। इस प्रकार धीरे-धीरे उन्होंने अपने आर्थिक जीवन में स्थिरता लाने के लिए कदम उठाए। समूह से जुड़ने के बाद रचना ने पहली बार 1,000 रुपये की चक्रीय राशि के रूप में ऋण प्राप्त किया, जिसे उन्होंने घरेलू खर्चों को पूरा करने में इस्तेमाल किया। इसके बाद उन्होंने CIF और बैंक ऋण राशि से 04 बार मे 1,42,200 रुपये का ऋण लिया और उस राशि का उपयोग जनरल स्टोर खोलने में किया। जनरल स्टोर का संचालन शुरू करने से उनकी आय में वृद्धि हुई और लखपति दीदी योजना अंतर्गत रचना दीदी सीआरपी का कार्य करने लगी।

  श्रीमती रचना दीदी के परिवार मे आय के स्त्रोत जनरल स्टोर, खेती और सीआरपी के कार्य से वर्तमान में उनकी वार्षिक शुद्ध आय 1,27,300 रुपये डिजिटल आजीविका रजिस्टर मे दर्ज की गई है, जो कि उनकी आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक कहानी को और भी मजबूत बनाती है। इस प्रकार श्रीमती रचना ने न केवल अपने परिवार के लिए अतिरिक्त आय का साधन विकसित किया, बल्कि उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता और व्यावसायिक सूझबूझ को भी साबित किया।

   आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद श्रीमती रचना के जीवन में कई परिवर्तन आए हैं। आज श्रीमती रचना एक सफल व्यवसायी हैं। उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है और पहले उनके परिवार की आया जो 9500 रूपये प्रतिमाह थी, वह अब बढ़कर 22000 रूपये प्रतिमाह हो गई है। उनके पति बाबुलाल भी अब अपनी पत्नी के साथ मिलकर काम करते हैं और दोनों ने मिलकर अपने परिवार के लिए एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण किया है। श्रीमती रचना की कहानी यह दर्शाती है कि एक साधारण गृहिणी जो पहले अपने परिवार के सीमित संसाधनों पर निर्भर थी, कैसे अपने जीवन को बदल सकती है और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकती है।

   उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर और आजीविका मिशन के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनने की दिशा में कदम उठाए है। उनकी मेहनत, समर्पण और साहस ने उन्हें एक सफल व्यवसायी और एक प्रभावशाली सामुदायिक नेतृत्वकर्ता बना दिया है। उनके द्वारा की गई बचत, ऋण का सही उपयोग और नए व्यावसायिक प्रयासों ने उनके परिवार को स्थाई आजीविका और सुरक्षित जीवन प्रदान किया है। श्रीमती रचना की यात्रा हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो अपने जीवन में कुछ बड़ा करने का सपना देखती है। उनकी कहानी यह सिखाती है कि यदि कोई दृढ़ संकल्प और मेहनत के साथ काम करता है, तो वह अपने और अपने परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। श्रीमती रचना दीदी की इस सफलता को प्रोत्साहित करते हुए शासन द्वारा उन्हें 26 जनवरी के अवसर पर दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्र स्तरीय समारोह में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है, जहां वे कार्यक्रम में शामिल होंगी।

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