नव वर्ष की पूर्व संध्या पर खेतों में हुआ अनोखा आयोजन, किसानों ने पूजा-पाठ कर 2026 से मांगी सुनहरी फसल की सौगात


सीहोर। वर्ष 2025 को विदा करते हुए और 2026 के स्वागत में क्षेत्र के ग्रामीण किसानों और महिलाओं ने एक ऐसा दृश्य रचा, जिसने पूरे अंचल को आस्था, आशा और उत्सव से भर दिया। किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में ग्राम उलझावन, रलावती, भोजनगर सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों किसान और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में कलश, लोटा और पूजा सामग्री लेकर भजन-कीर्तन करते हुए मंदिर से खेतों तक निकलीं। सिर पर कलश, हाथों में आस्था और होठों पर भगवान के नाम के साथ यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीदों का उत्सव बन गई।


खेतों तक पहुंचकर महिलाओं और किसानों ने गेहूं की फसल की विधिवत पूजा की। हनुमान जी, खंडेराव बाबा और श्रीराम से हाथ जोड़कर यह प्रार्थना की गई कि बीते वर्ष की सोयाबीन की बर्बादी का दुख अब समाप्त हो और 2026 किसानों के लिए खुशहाली लेकर आए। भजन मंडली की महिलाओं कृष्णा बाई, सावित्री बाई, गायत्री बाई, शांताबाई, सीताबाई, प्रेम बाई, सरोज बाई सहित अनेक श्रद्धालु महिलाओं ने ढोलक, पेटी और झांझ के साथ भजन गाकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।


 सरकार के प्रति आभार, भविष्य से उम्मीदें


किसान और समाजसेवी एमएस मेवाड़ा सहित किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार जताते हुए कहा कि भावांतर योजना से मिली राहत और खराब सोयाबीन फसल का मुआवजा उनके लिए संजीवनी बना। इसी भावुक वातावरण में किसानों ने मांग रखी कि नए वर्ष में फसल बीमा राशि समय पर मिले, ताकि मेहनत की फसल सुरक्षित रहे। महिलाओं ने लाडली बहना योजना की राशि 3000 रुपये किए जाने की भी उम्मीद जताई और पेंशनधारक महिलाओं को नियमित भुगतान की मांग रखी।


 गांव-गांव में खुशहाली की कामना


इस अनोखे आयोजन ने केवल नए वर्ष का स्वागत नहीं किया, बल्कि गांवों में एकजुटता और आशा का दीप जला दिया। ढोलक की थाप, शंखनाद और जयकारों के बीच खेतों में खड़े किसान और महिलाएं यह कहते नजर आए और कहा कि धरती माँ अगर मुस्कराई तो पूरा गांव मुस्कराएगा। 2026 को उन्होंने अन्न, आनंद और अमन का वर्ष बनाने की प्रार्थना की


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