सिहोर जिले में प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जताखेड़ा स्थित एक निजी स्कूल को लेकर आज उस समय विवाद गहरा गया, जब हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल परिसर पहुंचे। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन बच्चों को कलावा बांधने और तिलक लगाने की अनुमति नहीं देता। हालांकि, इस आरोप की वास्तविकता को लेकर अभी गहन जांच की आवश्यकता बताई जा रही है।
विवाद उस वक्त और बढ़ गया, जब सोशल मीडिया पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ पोस्ट और तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं। इसी बीच जिला शिक्षा अधिकारी ने एक बयान जारी कर कहा कि वायरल तस्वीर लगभग तीन माह पुरानी है और किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान की है।
आरोप यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी के इस बयान की सत्यता की जांच किए बिना ही जिला जनसम्पर्क अधिकारी ने उसे अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट कर दिया। लेकिन जैसे ही स्कूल में धार्मिक संगठनों के कार्यकर्ताओं और अभिभावकों के पहुंचने की सूचना सामने आई, जिला जनसम्पर्क अधिकारी को वह पोस्ट हटानी पड़ी।
पोस्ट हटाए जाने के बाद सफाई में कहा गया कि “अद्यतन और सही जानकारी जल्द जारी की जाएगी।” हालांकि, बयान जारी कर फिर उसे हटाने की इस पूरी प्रक्रिया ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमजन में यह चर्चा है कि क्या दबाव के चलते पोस्ट हटाई गई, और क्या बिना जमीनी जांच के बयान जारी करना उचित था।
फिलहाल पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है और अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और तथ्यों पर आधारित आधिकारिक स्पष्टीकरण पर टिकी हैं।
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