साहित्य जगत में शोक की लहर: पद्मश्री रामदरश मिश्र का 102 वर्ष की आयु में निधन, एक युग का हुआ अंत

 


नई दिल्ली। साहित्य जगत के वरिष्ठ कवि, कथाकार और चिंतक पद्मश्री रामदरश मिश्र के निधन से साहित्य संसार में गहरा शोक व्याप्त है। 102 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही हिंदी साहित्य के एक युग का अंत हो गया है।


रामदरश मिश्र ने अपने लेखन से हिंदी साहित्य को नई दिशा दी। वे न केवल एक सशक्त रचनाकार थे, बल्कि कई पीढ़ियों के लेखकों और पाठकों के लिए प्रेरणा स्रोत भी रहे।


102 वर्ष की उम्र में भी मिश्र जी का किताबों से गहरा लगाव लोगों के लिए अनुकरणीय था। उनके सादगीपूर्ण व्यक्तित्व और साहित्य के प्रति समर्पण ने हिंदी साहित्य को अमूल्य योगदान दिया।


बनेगा एक नया घर आसमान में कहीं, मगर धीरे-धीरे यह पंक्ति मानो आज उनके जीवन को साकार करती है।


साहित्य जगत उनके अमूल्य योगदान के लिए सदैव कृतज्ञ रहेगा।

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