सीहोर। बुजुर्गों की मुस्कान घर को स्वर्ग बना देती है, क्योंकि वे परिवार के लिए एक अनमोल धरोहर होते हैं, जिनके होने से घर आनंदित और खुशहाल रहता है। बुजुर्ग परिवार के मार्गदर्शक होते हैं और उनके आशीर्वाद से परिवार के सदस्यों को सही राह मिलती है। जिस घर में बुजुर्गों का निवास होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बुराई घर से कोसों दूर रहती है। उक्त विचार शहर के सैकड़ाखेड़ी स्थित संकल्प वृद्धाश्रम में कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने कहे।
उन्होंने कहाकि बुजुर्ग परिवार को संस्कारों और पारंपरिक मूल्यों की सीख देते हैं, जिससे परिवार में सामंजस्य और एकता बनी रहती है। परिवार की पहचान: बुजुर्ग परिवार की शान और पहचान होते हैं। उनका अनुभव और ज्ञान घर को सही दिशा देता है। अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस के अवसर पर सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के निर्देशानुसार कलेक्टर बाला गुरु के एवं महेश कुमार यादव उप संचालक सामाजिक न्याय के मार्गदर्शन में संकल्प वृद्ध आश्रम सीहोर में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, कार्यक्रम का शुभारंभ कथा वाचक पंडित श्री मिश्रा, आश्रम के मार्गदर्शक जितेन्द्र तिवारी, ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष दीपक शर्मा, समाजसेवी ज्योति अग्रवाल, भाजपा महिला मोर्चा नगर अध्यक्ष श्रीमती सीमा परिहार, नव ज्योति संगठन के अध्यक्ष हिमांशु सोनी, मनोज दीक्षित मामा, जिला पेंशन संगठन संगठन के अनिल शर्मा, सामाजिक न्याय विभाग सीहोर के कृपाल सिंह चौधरी, सावन गांगले, नवल किशोर मालवीय, आकाश राय, दुर्गा दास नागले, संकल्प वृद्ध आश्रम टीम आदि दीप प्रज्वलित कर किया गया। उक्त कार्यक्रम में 50 वृद्धजनों का सम्मान किया गया। जिसमें दो वृद्ध श्रीमती गेंद कुंवर बाई निवासी उल्लास खुर्द एवं श्रीमती सूरज वाजपेई निवासी कस्बा सीहोर जिनकी आयु 100 वर्ष से अधिक होने पर उन्हें विभाग की ओर से 1000 रुपए की राशि शतायु सम्मान के रूप में प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर यहां पर मौजूद वक्ताओं ने कहाकि यदि घर में बुजुर्गों से लड़कर मंदिर जाओगे तो कोई फायदा नहीं है। वहां भी आपका मन नहीं लगेगा। लोग क्रिया तो शुद्ध करते हैं मंदिर में पूजन करते हैं लेकिन भाव अशुभ होते हैं। तो वह पूजन कोई फलदायी नहीं होती। जैसे हम शुभ-अशुभ भाव करते हैं वैसा ही फल हमें मिलता है। तुम मंदिर में किस भावना से जा रहे हो इसका भगवान पर कोई फर्क नहीं पड़ता। तुम्हारे भाव शुद्ध होंगे तो कल्याण तुम्हारा ही होगा। माता-पिता सबसे बड़े सम्मान के हकदार होते है।

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