पुस्तकें आत्मा का पोषण करती हैं, मोबाइल सिर्फ तात्कालिक सहारा — डॉ. राजकुमार मालवीय रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की पुस्तक यात्रा में शिक्षा, साहित्य और समाज का संगम

भोपाल । रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू) द्वारा चलाई जा रही पुस्तक यात्रा सोमवार को विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों तक पहुंची। इस दौरान सभी वर्गों से गर्मजोशीपूर्ण सहयोग मिला।


भाजपा नेता डॉ. राजकुमार मालवीय ने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट क्षणिक जानकारी दे सकते हैं, परंतु पुस्तकें गहरे विचार और आत्मिक विकास का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि स्क्रीन की जगह किताब के पन्नों से जुड़ना अधिक स्थायी और संवेदनशील अनुभव है।


अनिल मालवीय ने स्वागत भाषण में कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, बल्कि अच्छे नागरिक बनाना होना चाहिए। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को पढ़ने की आदत और सोचने की दिशा देते हैं।


आरएनटीयू के संतोष उपाध्याय ने बताया कि यात्रा का उद्देश्य ज्ञान, साहित्य और शिक्षा को हर कोने तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि किताबें सिर्फ परीक्षा की तैयारी का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की नींव हैं।


इस मौके पर सचिन सराठे (ब्रांच हेड, आईसेक्ट सारनाथ), पंकज अरजिया (ब्रांच हेड, भरत नगर), केके मिश्रा, ओम यादव समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र उपस्थित रहे।


मां हिंगलाज सेवा समिति, यमन वेलफेयर कमेटी, कर्मयोगी जनकल्याण संस्था और हाईटेक ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन्स के सदस्यों, विद्यार्थियों और स्टाफ ने अतिथियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया। सभी के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई।


कार्यक्रम में पुस्तक प्रदर्शनी, वाचन और विचार-सत्र भी आयोजित हुए। प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना की और ऐसे आयोजनों को समय-समय पर दोहराने की बात कही।




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