सीहोर। गौकुल की मिट्टी खाकर कन्हैया ने जब मुंह खोला था तो माता यशोदा को पूरा ब्राहमांड दिख गया था। भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में गोवर्धंन पूजा कर प्राकृतिक के महत्वपूर्ण अंग जल,जंगल,जमीन,आकाश ग्रह,सूर्यं चन्द्रमा,सागर नदी,पर्वत की रक्षा करने का संदेश दिया था लेकिन अब वसुन्धरा की रक्षा नहीं की जा रही है प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जा रहा है जिस से भगवान का प्रकोप बाढ़,भुस्खन सूनामी तुफान भुकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के रूप में देखने को मिल रहा है। हमें कोई अधिकार नहीं है कि इस प्रकृति का दोहन करें। भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की सुख के लिए की है हमें आज सृष्टि के हर अंग की सुरक्षा करनी होगी यह बात शुक्रवार को श्रीमद भागवत कथा में श्रद्धालुओं के मध्य पं. आनंद मोहन शुक्ला ने कहीं।
कथावाचक पंडित शुक्ला ने बताया कि विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां जल जंगल जमीन पहाड़ भी पूजे जाते हैं उनके बिना मानव मात्र की कल्पना ही नही की जा सकती है। प्रकृति हमें जन्म से लेकर मृत्यु तक कुछ ना कुछ देती है क्योंकि यह मां है और मां हमेशा अपने पुत्रों का कल्याण करती हैं। बाल गोपाल कन्हैया ने खेलते हुए मिटटी खाकर उसे मुंह में छुपा माता यशोदा ने कन्हैया से मुंह खोलने को कहा, तब कन्हैया ने मुंह खोलने से बालहट कर मना कर दिया, लेकिन जब माता यशोदा के बार-बार कहने पर कन्हैया ने अपना मुंह खोला तो उसमे जल जंगल, सूर्य, चन्द्रमा, वन नदी सागर पहाड़ आदि दिखाई दिये जिन्हें देखकर माता अत्यन्त आश्चर्य चकित हो गई। अर्थात यह प्राकृति स्वयं परमात्मा है।
भगवान बाल गोपाल ने वृंदावन में इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा अर्चना की और अपनी एक छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर लिया। राजा इंद्र ने जब देखा कि गोकुलवासी उनकी पूजा नहीं कर रहे हैं तो उन्होंने मूसलाधार बारिश के साथ आंधी तूफान प्रकट किया लेकिन गोकुलवासियों ने भगवान की स्तुति की और संकटो से बच गए। इसी लिए सृष्टि में गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा की जाती है।
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