सीहोर। तप-पुरूषार्थ करने वाला ही ईश्वर क्रपा पाने का अधिकारी होता है।आलसी व्यक्ति ईश्वर आज्ञा का उल्लंघन करता है।ज्ञान मुक्ति का साधन है जबकि दुखों का मूल अज्ञान है। भूगोल शब्द वेदों से आया है अन्य मतों में विज्ञान विरूद्ध बाते हैं,वेद अपुरोषीय हैं।यह विचार महर्षि दयानंद मार्ग गंज स्थित आर्यसमाज मंदिर में जारी वेदकथा के दौरान बिजनौर उ.प्र. से पधारे वैदिक विद्वान आचार्य विष्णुमित्र वेदार्थी ने व्यक्त किए।।
उन्होंने कहा कि गायत्री को गुरु, सविता व महामंत्र भी कहा जाता है।इसके अर्थ में हमें पापों से छुड़ाने तथा बुद्धियों को प्रकाशित करने की ईश्वर से प्रार्थना की गई है।आचार्य वेदार्थी ने कहा कि इतिहास से विभिन्न मजहब मत सम्प्रदाय से उनके प्रवर्तकों को हटा दिया जाए,तो वह धाराशायी हो जायेंगे,किंतु सनातन वैदिक धर्म-संस्कृति किसी व्यक्ति पर आधारित नही है।मनुष्य केजीवन से धर्म निकल जाने से वह पशु तुल्य रह जाता है।मोक्ष का अर्थ दुखों,जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति है।सर्वज्ञ ईश्वर कभी मनुष्य की परीक्षा नही लेता है।
सोमवार से जारी वेद प्रचार सप्ताह का समापन रविवार को गंज स्थित राठौर धर्मशाला में प्रात:08 बजे वृहदयज्ञ में शामिल 101जोड़ों द्वारा प्रदत्त पूर्णाहूति से दोपहर 12 बजे होगा।संचालन आर्यसमाज के प्रधान नरेश आर्य ने किया एवं आभार रमेश आर्य ने व्यक्त किया।इसके पूर्व भजनोपदेशक प.भीष्म आर्य के गीतों,भजनों की संगीतमयी प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने जमकर सराहा।
कार्यक्रम में वैदिक प्रवक्ता संतोषसिंह,उपप्रधान तरुण जगवानी,मंत्री रितेश आर्य,आर. एस गौर,राजेन्द्र राठौर,बाबूलाल राठौर,सुरेंद्र राठौर,रामदीन राठौर सहित बड़ी संख्या में आर्यजन श्रद्धालु,महिलाएं शामिल रहे।


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