न्याय सबके लिए" की परिकल्पना को डिफेंस काउंसिल्स के माध्यम से साकार कर रहा है सीहोर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण

सीहोर, 17 मार्च, 2025  राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की लीगल एड डिफेंस काउंसिल स्कीम 2022 के अंतर्गत राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा निर्देशों एवं प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष श्री सतीश चंद्र शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सीहोर जिला न्यायालय में निरंतर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं कुशलतापूर्वक प्रदान की जा रही है।

 

      न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती स्वप्नश्री सिंह बताया कि सीहोर जिला मुख्यालय पर कुल 05 लीगल एड डिफेंस काउंसिल श्री आसिफ खान, श्री राजेंद्र कुशवाह, श्री अमन कुलश्रेष्ठ, कु. एकता सेन एवं कु. संयोगिता सोलंकी चयनित होकर पूर्णतः विधिक सेवा का कार्य कर रहे हैं। इनके द्वारा आपराधिक मामलों में बचाव पक्ष अधिवक्ता के रूप में अपनी प्रभावी सेवाएं दे रहे हैं।

 

      श्री आसिफ खान डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल द्वारा सीहोर न्यायालय में लंबित हत्या के प्रकरण शासन वि. लक्की राठौर धारा 302, 324 भा.द.स. में पैरवी की गई जिसमें आरोपिया लक्की राठौर पर अपने जेठ की हत्या करने का आरोप था एवं सीहोर न्यायालय में लंबित बलात्कार के अन्य प्रकरण शासन वि. सुनील गुर्जर धारा 363, 366,376(2) (एन), 344 भा.द.स. एवं 5/6 पॉक्सो एक्ट के प्रकरण में आरोपी सुनील गुर्जर पर नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने का आरोप था, दोनो प्रकरणो में पैरवी की गई और प्रकरण में साक्ष्य के आधार पर न्यायालय द्वारा आरोपियों को दोषमुक्त किया गया।
सीहोर के न्यायालय में शासन वि. जितेन्द्र जांगड़ा धारा 302 भा.द.स. में आरोपी जितेन्द्र पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोपी था, जिसमें श्री राजेन्द्र कुशवाह डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल द्वारा पैरवी की गई और प्रकरण में साक्ष्य के आधार पर न्यायालय द्वारा आरोपी को दोषमुक्त किया गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के न्यायालय सीहोर में शासन वि. राकेश खत्री में आरोपी पर धारा 354, 294, 506, 384 भा.द.स. 67-ए आईटी एक्ट में आरोप था, जिसमें लीगल एड डिफेंस काउंसिल द्वारा पैरवी की गई एवं आरोपी दोषमुक्त किया गया।

 

      इस प्रकार वर्ष 2024 में लीगल एड डिफेंस काउंसिल द्वारा कुल 287 प्रकरणों में पेरवी की गई जिसमें 173 मजिस्ट्रेट विचारण एवं 114 सत्र विचारण प्रकरण सम्मिलित हैं। इन प्रकरणों में से 31 सत्र विचारण निराकृत होकर 17 प्रकरणों में आरोपी को न्यायालय द्वारा दोषमुक्त किया गया इसी प्रकार 67 मजिस्ट्रेट विचारण निराकृत होकर 57 प्रकरणों में आरोपी को दोषमुक्त किया गया। इसी प्रकार 131 प्रकरणों में रिमांड स्तर पर आरोपी की पेरवी की गई। कुल 129 प्रकरण में आरोपी की और से जमानत आवेदन प्रस्तुत किए गए जिसमें 88 स्वीकृत होकर आरोपी को जमानत पर उन्मुक्त किया गया। कुल 511 साक्षी का प्रतिपरीक्षण किया गया एवं 1387 व्यक्तियों को विधिक परामर्श उपलब्ध कराया गया। कुल 42 आरोपीगण को मुचलके पर उन्मुक्त कराया गया।

 

      इनके द्वारा नियमित रूप से जेल निरीक्षण किया जाता है एवं 249 बंदीगंण को विधिक सहायता तथा 16 बंदियों की दण्डादेश के विरुद्ध अपील सत्र न्यायालय में प्रस्तुत की गई एवं माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुति हेतु अपेक्षित सहयोग प्रदान किया गया। लीगल एड डिफेंस काउंसिल द्वारा जेल में स्थापित लीगल एड क्लीनिक पर भी बंदियों को निशुल्क विधिक सहायता एवं परामर्श, अपील प्रस्तुति एवं प्रकरणों की अद्यतन जानकारी देने के संबंध में निरंतर सेवाएं प्रदान की जा रही है। अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी द्वारा अनुशंसित बंदियों को जमानत पर उन्मुक्त किए जाने संबंधी कार्यवाही में भी इनका सक्रिय भूमिका रही है।

 

      लीगल एड डिफेंस काउंसिल का कार्य उल्लेखनीय रहा है एवं पक्षकारों को प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण विधिक सेवाएं प्राप्त हो रही हैं। यदि किसी भी व्यक्ति जो अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला, बच्चे, औद्योगिक कर्मकार, शारीरिक व मानसिक रूप से असमर्थ, जेल बंदी, प्राकृतिक आपदा से पीड़ित, ह्यूमन ट्रैफिकिंग से पीड़ित, वार्षिक आय 2 लाख रूपये से कम आदि श्रेणियों में आता है एवं उसको जिला न्यायालय सीहोर स्तर पर आपराधिक मामलों में निशुल्क विधिक सहायता की आवश्यकता हो तो वह कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में स्थित लीगल एड डिफेंस काउंसिल के कार्यालय में आकर संपर्क कर सकते हैं एवं निशुल्क सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

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