सीहोर। झोपड़ों में वर्षो से रह रहे लोगों को प्रशासन ने दो दिनों के अंदर जमीन खाली करने का नोटिस थमा दिया है। नोटिस में जमीन खाली नहीं करने पर प्रशासन के द्वारा झोपड़े तोडऩे की की चेतावनी भी दी गई है। प्रशासन के द्वारा दिए गए नोटिस लेकर गणेश मंदिर रोड के किनारे बीते 50 सालों से झोपड़े नुमा मकान बनाकर रहने वाले सैकड़ों महिला पुरूष और बच्चे मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर रोने लगे।
महिलाओं ने कहा की हमारे नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में नहीं आए है। मकान टूट गए तो अब छोटे छोटे बच्चों को लेकर कहा जाएंगे और कहा रहेंगे,हमारे पास कहीं पर कोई जमीन मकान दुकान नहीं है। घर के पुरूष मजदूरी और गणेश मंदिर के पास छोटी दुकाने चलाकर परिवार का पालन पोषण करते है। नागरिकों ने कहा की हमारे पूर्वज इस भूमि पर लगभग 50 बरसों से रह रहे हैं,इस भूमि पर हमारी तीन पीडिय़ा निकल चुकी है हमारे पास भारत भर में कहीं पर भी कोई भूमि या संपत्ति नहीं है। हमारे पास समग्र आईडी और पहचान पत्र भी है। हमारे पास नगर पालिका और नजूल को टैक्स की रसीदें भी है। हम यही के निवासी है। हम गरीबों को यहां से नहीं हटाया जाए वरना हमें भूखा मरना पड़ेगा।
कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में पहुंचे राहुल प्रजापति,राजेश,जितेंद्र,पंकज मालवीय,सतीश कुमार,अजय,दीपक मालवीय,भूरी बाई,सुमन,पूर्णिमा,आशा बाई,बबीता प्रजापति, मंजू बाई,सुनीता बाई,विक्की वारिया,लखन,बाबूलाल,दिनेश,सोनू प्रजापति,कमलेश प्रजापति,पूजा प्रजापति,बलराम,दुर्गा बाई,शारदा बाई,हरीश,हेमंत मोंटी,पवन,दिनेश कुमार, संजय,लक्की,हरीश,कृष्णा,अभिषेक,संजय प्रजापति आदि ने प्रशासन से झोपड़े तोडऩे जरूरी होने पर झोपड़ों को तोडऩे से पहले मकान के लिए जमीन और मकान बनाने के लिए आर्थिक मदद देने की मांग की है।
कलेक्ट्रेट में रोती रही बच्चों के साथ पहुंची महिलाऐं
झोपड़ों में रह रहे लोगों को प्रशासन ने दिया नोटिस
साहब जमीन दो और मकान बनाने के लिए पैसा भी दो तब तोडऩा हमारे मकान
प्रधानमंत्री आवास योजना में भी नहीं आया है हम गरीब लोगों का नाम
जमीन दो दिनों के अंदर करों खाली वरना हम तोड़ देंगे,
प्रशासन के आदेश से परेशान हे कई गरीब परिवार
फोटो
सीहोर। झोपड़ों में वर्षो से रह रहे लोगों को प्रशासन ने दो दिनों के अंदर जमीन खाली करने का नोटिस थमा दिया है। नोटिस में जमीन खाली नहीं करने पर प्रशासन के द्वारा झोपड़े तोडऩे की की चेतावनी भी दी गई है। प्रशासन के द्वारा दिए गए नोटिस लेकर गणेश मंदिर रोड के किनारे बीते 50 सालों से झोपड़े नुमा मकान बनाकर रहने वाले सैकड़ों महिला पुरूष और बच्चे मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर रोने लगे।
महिलाओं ने कहा की हमारे नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में नहीं आए है। मकान टूट गए तो अब छोटे छोटे बच्चों को लेकर कहा जाएंगे और कहा रहेंगे,हमारे पास कहीं पर कोई जमीन मकान दुकान नहीं है। घर के पुरूष मजदूरी और गणेश मंदिर के पास छोटी दुकाने चलाकर परिवार का पालन पोषण करते है। नागरिकों ने कहा की हमारे पूर्वज इस भूमि पर लगभग 50 बरसों से रह रहे हैं,इस भूमि पर हमारी तीन पीडिय़ा निकल चुकी है हमारे पास भारत भर में कहीं पर भी कोई भूमि या संपत्ति नहीं है। हमारे पास समग्र आईडी और पहचान पत्र भी है। हमारे पास नगर पालिका और नजूल को टैक्स की रसीदें भी है। हम यही के निवासी है। हम गरीबों को यहां से नहीं हटाया जाए वरना हमें भूखा मरना पड़ेगा।
कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में पहुंचे राहुल प्रजापति,राजेश,जितेंद्र,पंकज मालवीय,सतीश कुमार,अजय,दीपक मालवीय,भूरी बाई,सुमन,पूर्णिमा,आशा बाई,बबीता प्रजापति, मंजू बाई,सुनीता बाई,विक्की वारिया,लखन,बाबूलाल,दिनेश,सोनू प्रजापति,कमलेश प्रजापति,पूजा प्रजापति,बलराम,दुर्गा बाई,शारदा बाई,हरीश,हेमंत मोंटी,पवन,दिनेश कुमार, संजय,लक्की,हरीश,कृष्णा,अभिषेक,
संजय प्रजापति आदि ने प्रशासन से झोपड़े तोडऩे जरूरी होने पर झोपड़ों को तोडऩे से पहले मकान के लिए जमीन और मकान बनाने के लिए आर्थिक मदद देने की मांग की है।
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कलेक्ट्रेट में रोती रही बच्चों के साथ पहुंची महिलाऐं
झोपड़ों में रह रहे लोगों को प्रशासन ने दिया नोटिस
साहब जमीन दो और मकान बनाने के लिए पैसा भी दो तब तोडऩा हमारे मकान
प्रधानमंत्री आवास योजना में भी नहीं आया है हम गरीब लोगों का नाम
जमीन दो दिनों के अंदर करों खाली वरना हम तोड़ देंगे,
प्रशासन के आदेश से परेशान हे कई गरीब परिवार
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सीहोर। झोपड़ों में वर्षो से रह रहे लोगों को प्रशासन ने दो दिनों के अंदर जमीन खाली करने का नोटिस थमा दिया है। नोटिस में जमीन खाली नहीं करने पर प्रशासन के द्वारा झोपड़े तोडऩे की की चेतावनी भी दी गई है। प्रशासन के द्वारा दिए गए नोटिस लेकर गणेश मंदिर रोड के किनारे बीते 50 सालों से झोपड़े नुमा मकान बनाकर रहने वाले सैकड़ों महिला पुरूष और बच्चे मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर रोने लगे।
महिलाओं ने कहा की हमारे नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में नहीं आए है। मकान टूट गए तो अब छोटे छोटे बच्चों को लेकर कहा जाएंगे और कहा रहेंगे,हमारे पास कहीं पर कोई जमीन मकान दुकान नहीं है। घर के पुरूष मजदूरी और गणेश मंदिर के पास छोटी दुकाने चलाकर परिवार का पालन पोषण करते है। नागरिकों ने कहा की हमारे पूर्वज इस भूमि पर लगभग 50 बरसों से रह रहे हैं,इस भूमि पर हमारी तीन पीडिय़ा निकल चुकी है हमारे पास भारत भर में कहीं पर भी कोई भूमि या संपत्ति नहीं है। हमारे पास समग्र आईडी और पहचान पत्र भी है। हमारे पास नगर पालिका और नजूल को टैक्स की रसीदें भी है। हम यही के निवासी है। हम गरीबों को यहां से नहीं हटाया जाए वरना हमें भूखा मरना पड़ेगा।
कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में पहुंचे राहुल प्रजापति,राजेश,जितेंद्र,पंकज मालवीय,सतीश कुमार,अजय,दीपक मालवीय,भूरी बाई,सुमन,पूर्णिमा,आशा बाई,बबीता प्रजापति, मंजू बाई,सुनीता बाई,विक्की वारिया,लखन,बाबूलाल,दिनेश,सोनू प्रजापति,कमलेश प्रजापति,पूजा प्रजापति,बलराम,दुर्गा बाई,शारदा बाई,हरीश,हेमंत मोंटी,पवन,दिनेश कुमार, संजय,लक्की,हरीश,कृष्णा,अभिषेक,
संजय प्रजापति आदि ने प्रशासन से झोपड़े तोडऩे जरूरी होने पर झोपड़ों को तोडऩे से पहले मकान के लिए जमीन और मकान बनाने के लिए आर्थिक मदद देने की मांग की है।
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