मध्यप्रदेश वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन शीघ्र मांग पुरी नही हुई तो लेगें न्यायालय की शरण-चैतन कुमार आर्य



सीहोर।  गुरुवार, 26 सितम्बर 2024 को वन मंडल कार्यालय सीहोर में मुख्यमंत्री, वन मंत्री एवं प्रधान वन संरक्षक  को सम्बोधित ज्ञापन कलेक्टर व वन मंडलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।  जिसमें बताया गया कि म.प्र.तृतीय वर्ग श्रेणी अलिपकीय भर्ती नियम वर्ष 1967 एवं म.प्र तृतीय वर्ग श्रेणी अलिपकीय भर्ती नियम 2001 में अंकित वन रक्षकों के वेतनमानों में भिन्नता होने के कारण 6वें वेतनमान में विसंगति निर्मित हुई हैं। जिसके संबंध में संघ के द्वारा विगत कई वर्षों से शासन-प्रशासन से वनरक्षकों का वेतनमान एक पद, एक वेतनमान की मांग करता आ रहा था। विभाग द्वारा भर्ती नियमों में संशोधन करते हुए म.प्र. राजपत्र (असाधारण) प्राधिकार से प्रकाशित वन विभाग मंत्रालय, वल्लभ भवन भोपाल के द्वारा 08/09/2014 को म.प्र. तृतीय श्रेणी अलिपकीय वर्गीय वन सेवा भर्ती नियम 2000 में संशोधन किया गया है जबकि, छत्तीसगढ़ राज्य शासन वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मंत्रालय महानदी ● भवन, नवा रायपुर, अटल नगर दिनांक 20/07/2023 के आदेश में वेतन विसंगति को देखते हुए वन विभाग में विभागीय सेटप स्वीकृति दिनांक 26/03/2003 के बाद नियुक्त किये गये समस्त वन रक्षकों का वेतनमान 3050-4590 मान्य किया गया है।

वन विभाग में यह बड़ी विडम्बना है कि, एक ही पद के लिए 2 वेतनमान यह बड़ी विसंगति है। दिनांक 08/09/2014 के बाद नियुक्त वन रक्षकों को इसके पूर्व नियुक्त वन रक्षकों के वेतन से अधिक वेतन प्राप्त कर रहे है। वन रक्षकों द्वारा 5680-1900 म.प्र. में जिलेवार वन मण्डलाधिकारी एवं संयुक्त कोष एवं लेखा के अनुमोदन के उपरांत ही कर्मचारियों को प्राप्त हुआ है। इसमें वन रक्षकों की कोई गलती नहीं है, क्योंकि वेतन निर्धारण वन मण्डलाधिकारी के कार्यालयों में पदस्थ स्थापना प्रभारी द्वारा वेतन निर्धारण किया जाता है। इसमें बहुत बड़ी विसंगति उत्पन्न हुई है जिसका खामियाजा वनरक्षकों को मजबूरन भुगतना पड़ रहा है।
उक्त आदेश के विरूद्ध की जाने वाली वसूली पर रोक लगाई जावें। चूंकि वनरक्षक सीधी भर्ती का पद है। वित्त विभाग मध्यप्रदेश शासन मंत्रालय वल्लभ भवन के पत्र क्रमांक एफ-8/2009/नियम/चार दिनांक 20/08/2009 के द्वारा दिनांक 01/01/2006 को अथवा उसके पश्चात् सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारियों एवं अधिकारियों के वेतन पुर्नरक्षित वेतन ढांचे में सुधार किया गया है उक्त पत्र की कंडिका-3 में स्पष्ट निर्देश है कि, राज्य शासन के सभी विभाग दिनांक 01/01/2006 या उसके पश्चात् नियुक्त कर्मचारी/अधिकारियों विभागीय सेवा भर्ती नियमों में सुधार हेतु निर्देश दिया गया था लेकिन विभाग द्वारा सेवा भर्ती नियमों में सुधार तो किया गया लेकिन उस सुधार में दिनांक निश्चित् नहीं की गई की कब से लागू होगा। इसलिए भर्ती नियमों में सुधार दिनांक से प्रभावशील हो गया। वित्त विभाग के निर्देशानुसार भर्ती नियमों में 01/01/2006 से प्रावधान किये जाने की महान कृपा की जायें।
मांग की गई है कि आदेश के विरूद्ध वसूली पर रोक लगाई जावे एवं छत्तीसगढ़ राज्य शासन वन विभाग की भांति 01/01/2006 से सेवा भर्ती नियमों में संशोधन कराया जावें। उक्त आदेश के विरूद्ध वसूली पर रोक नहीं लगाई जाती है तो संघ न्यायालय की शरण में जाने के लिए बाध्य होगा। ज्ञापन सौपने वालों में प्रमुख रूप से चैतन कुमार आर्य वन कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष, भुपेन्द्र सिंह दुगेरिया, दीपक वैदी, जय सक्सेना, श्रीराम कुमरे, हसीन अहमद सिद्दिकी, मुकेश ठाकुर, संजय शर्मा, मो.शोहेब खान, अरूण पैठारी, व्ही.डी.मिश्रा, डी.पी.विश्वकर्मा, धनन्जय त्यागी, यशवंत गोयल, श्यामसुन्दर सिंह, अमरसिंह रावत आदि उपस्थित रहे।

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