सीहोर दशलक्षण धर्म चतुर्थ दिवस उत्तम शौच धर्म का है। शौच का मतलब है- पवित्रता का भाव। और वह आत्मा का गुण होने से धर्म है। इसलिए शौच धर्म सार्थक कहा गया है। अतः शुचिता; कर्मों के क्षय, आत्मा की प्राप्ति के लिए अपनाते हैं। इसलिए ये दस धर्म प्रकट होते है। पिङावा से पधारे हुए विद्वान पंडित राजकुमार शास्त्री ने श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर मे शास्त्र वाचन करते हुए आगे बताया कि
आत्मा में प्रकट अति लोभ, तृष्णा से छूटना भी शौच है। आत्मिक पवित्रता तभी आती है जब विषय वासना रूप भावों को छोड़ते हैं। प्रत्येक जीव की आत्मा में अनंत शक्ति है परंतु उसे कर्मों ने आच्छादित किया है। जैसे-जैसे हम कर्मों को धोते हैं, वैसे-वैसे शुचिता धर्म प्रकट होने लगता है। हमारी आत्मा को हमें उज्जवल बनाने के लिए; विकारी परिणामों को, बुरे विचारों को, गंदे भावों को दूर करना पड़ेगा।ऐसा करने से ही आत्मा में आत्म गुण प्रकट हो पाएंगे।
शौच धर्म की पूजा से पूर्व 9 वे तीर्थंकर भगवान श्री पुष्पदंतनाथ का निर्वाण लाडू भी चढ़ाया गया जिसे चढ़ाने का सौभाग्य श्री अजय जी,अंशुल जी सकल दिगम्बर जैन समाज सीहोर को प्राप्त हुआ।
दस लक्षण पर्व चतुर्थ दिवस धर्म सभी धार्मिक कार्यक्रम त्याग तपस्या और संयम से मनाए जा रहे है इसी श्रंखला में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर छावनी सीहोर में पिड़ावा से पधारे अतिथि विद्वान श्री राजकुमार जी शास्त्री के मार्ग दर्शन में गीत संगीत के साथ अभिषेक शांति धारा पूजन विधान आदि अनुष्ठान चल रहे है विशेष रूप से आज 1008 भगवान पुष्पदंत नाथ भगवान का निर्वाण कल्याणकिग महोत्सव निर्वाण दलाडू चढ़ा कर मनाया गया!
आज के मुख्य सौभाग्यशाली परिवार प्रथम शांति धारा कर्ता श्री प्रदीप कुमार,दीपक कुमार,प्रयक ,प्रतीक,अमित,अमन,शुभ,आगम,मनीष,आदि,व्रतिका लिलेहरिया परिवार शांति धारा एवम विधान कर्ता गुलशन श्रीमति पुष्पा ऋषभ कुमार,श्री अशोक कुमार कुमार,विल्सन,भोलू,विराज,ईशान,श्रीमती रिंकी , प्रणत,प्रत्युष काव्यांश लिलहरिया परिवार
.सोधर्म इंद्र स्वर्ण कलशाभिषेक कर्ता श्री विराज
गुलशन ईशान इंद्र स्वर्ण कलशाभिषेक कर्ता=श्री प्रदीप कुमार प्रतीक कुमार लिलहरिया परिवार
प्रथम चार कलशा अभिषेक श्री प्रणत गुलशन जी
.श्री अंशुल अजय धनपाल पार्वती वाले
श्री टोनी विमल कुमार जी जैन लिलेहरिया को प्राप्त हुआ!

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