सीहोर। हिन्दु उत्सव समिति की बैठक बुधवार को नगर पालिका सभागार में श्रीराम के जयघोष के साथ प्रारंभ हुई। जिसमें आगामी उत्सवों को लेकर विस्तार से चर्चा कर कई निर्णय सर्वसहमति से पारित किये गये। जैसा कि ज्ञात्वय है कि सीहोर का अनन्त चर्तुदर्शी चल समारोह कई परम्पराओं को संझोये हुए व सीहोर के अतीत को दर्शाता है। यहाँ एक ओर युवा जिम जैसे आधुनिकता की होड़ में आकर्षित हो रहे हैं, वहीं दूसरी और हमारे आखाड़े प्राचीनकाल से हमारे उत्सवों, हमारी सुरक्षा एवं शारिरिक व्यायाम को लेकर आज भी पुरानी वास्तविक परम्परा निभाते चले आ रहे हैं। उन्हें सुचारू रूप से संचालित करना किसी एक व्यक्ति की ही नही सर्व समाज की जिम्मेदारी है। उक्त विचार व्यक्त करते हुए सीहोर नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर ने हिन्दु उत्सव समिति की आयोजित बैठक में व्यक्त करते हुए कहा कि सीहोर की अनन्त चतुर्दशी का इतिहास स्वर्णीम रहा है। जिसे पुन: जीवित करने का हिन्दु उत्सव समिति जो प्रयास कर रही है, वह सराहनीय है। मैं व नगर पालिका की ओर से हर सम्भव मदद कर चल समारोह को भव्य और विशाल बनाने हेतु हिन्दु उत्सव समिति के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर हमारी प्राचीन परम्परा को सुचारू रूप से संचालित करने हेतु संकल्पित हैं। नगर पालिका द्वारा समस्त चल समारोह में शामिल अखाड़ों व झाकियों को प्रोत्साहन राशि एवं सम्मान कर उत्साह वर्धन करने का प्रयास करुंगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हिन्दु उत्सव समिति के संरक्षक हरीशचन्द्र अग्रवाल, पूर्व नपाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा, सेन समाज अध्यक्ष तुलसीराम सेन, कथा वाचक शैलेश तिवारी, सुनील दुबे, पार्षद लोकेन्द्र वर्मा, अखाड़ा संघ के अध्यक्ष राजु राठौर पहलवान, पं.महेश दुबे, पार्षद अजय पाल, सुनील अग्रवाल, कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दु उत्सव समिति के अध्यक्ष आशीष गुप्ता ने की। सर्वप्रथम अतिथियों का स्वागत हिन्दु उत्सव समिति के प्रवक्ता राजेन्द्र नागर ने अंग वस्त्र उड़ा कर सभी का सम्मान किया। आयोजित बैठक में उपस्थित आखाड़ों के उस्तादों एवं झाँकी निर्माताओं के पदाधिकारियों ने व अखाड़ों के उस्तादों व खलिफाओं शामिल होकर अनन्त चर्तुदर्शी चल समारोह को उत्साह व उमंग के साथ निकालने की रूप रेखा बताते हुए चलसमारोह के दौरान आने वाली परेशानियों से भी अवगत कराया एवं सर्वसहमति से इस वर्ष स्थानीय कोतवाली चौराहे से रात्रि 10 बजे आगामी 17 सितम्बर को चल समारोह प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया एवं कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा कर उचित निर्णय लिये गये। उपस्थित अखाड़ों एवं झाँकी निर्माताओं ने भारतीय संस्कृति को अभिन्न उत्सवों को उत्साह पूर्वक मनाने का वचन दिया।