हस्त नक्षत्र में शनिश्चरी सर्व पितृमोक्ष अमावस्या का दुर्लभ सयोग- पंडित सुनील शर्मा गौसेवा, ब्राह्मण भोजन और पौधारोपण का विशेष महत्व


सीहोर l नवग्रह में भगवान शनिदेव को अपने इष्ट देव भगवान शंकर से आशीर्वाद प्राप्ति में न्यायधीश का दायित्व मिला है l इसलिए न्यायधीश शनिदेव कर्मफल दाता है l पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस बार पितृपक्ष में दुर्लभ संयोग बन रहा है इस वर्ष शनिवार 10 अक्टूबर को हस्त नक्षत्र में शनिश्चरी सर्व पितृमोक्ष अमावस्या रहेगी। जिलेभर में मां नर्मदा, मां पार्वती व सिवन घाट पर श्रद्धा उत्साह के साथ श्रद्धालु स्नान दान एवं पूजा अर्चना कर शनिश्चरी पितृ मोक्ष अमावस्या मनाएंगे । साढेसाती वाले जातको को शनिश्चरी अमावस्या पर शिवशक्ति, हनुमानजी और शनिदेव की विशेष पूजा अर्चना लाभप्रद है l भगवान शनि मंत्र जाप, हवन पूजन,छायादान करना चाहिये और सरसोतेल, तिलतेल से अभिषेक कर कालीउड़द, कालेतिल,काला कपड़ा, इमरती, नीले फूल भेंट करना चाहिये l गरीब जरूरतमंदो को अन्न, वस्त्र, छाता, देना चाहिये। पीपल व शमी वृक्ष के पास दीपक लगाना चाहिये और रुद्राभिषेक, हनुमान चालीसा, शनि चालीसा, दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करना चाहिये।


गौ सेवा, ब्राह्मण भोजन और पौधारोपण का पितृपक्ष में विशेष महत्व


ऋषि- मुनियों द्वारा रचित धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य पर तीन मुख्य ऋण देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण बताए गए हैं। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इन तीनों ऋणों से मुक्ति और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर पितृपक्ष श्राद्ध पक्ष वर्तमान में चल रहा है l हम अपने पूर्वजों की तिथि अनुसार उनका पितृपक्ष में श्राद्ध तर्पण करते हैं और जिन पितरों की हमें तिथि ज्ञात नहीं होती है उनका हम श्राद्ध तर्पण पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन करते हैं l गरुण पुराण के अनुसार पितृपक्ष के दौरान हमारे पूर्वज सूक्ष्म रूप में पृथ्वी लोक पर निवास करते हैं और वंशजों द्वारा अर्पित जल, अन्न और श्रद्धा ग्रहण कर उन्हें सुख, शांति व समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार पितृपक्ष की इस अवधि में श्रद्धालु मां नर्मदा, पार्वती तट, सिवन घाट सहित जिले में प्रवाहमान नदियों पर व अपने घर पर व्यवस्था अनुसार पितरों को जो, तिल, कुशा के माध्यम से जल अर्पित कर तर्पण करते हैं और उनके निमित्त ब्राह्मण भोजन, अन्नदान, वस्त्रदान, गौसेवा और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना करना चाहिए l पूर्वजों की आत्मा की शांति और सद्गति के लिए श्रीमद्भागवत कथा पितृ भागवत व पितृ सूक्त का पाठ करवाना चाहिए। पितरों की स्मृति में पीपल, बरगद व फलदार पौधों का रोपण व दीपक लगाना चाहिए।                  


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