आज लगेगा छप्पन भोग, गोवर्धन पूजन का बताया जाएगा महत्व किसी भी योनि का जीव कर सकता है भगवद्प्राप्ति, मन ही बंधन और मुक्ति का कारण-भागवत भूषण पंडित अरविंद व्यास


सीहोर। भगवान को छल-कपट पसंद नहीं है। जिसका मन निर्मल और भाव सच्चे होते हैं, उसकी पुकार भगवान तक शीघ्र पहुंचती है। भगवद्प्राप्ति के लिए जीव की योनि महत्वपूर्ण नहीं होती, उच्च योनि से लेकर निम्न योनि तक कोई भी जीव सच्ची भक्ति और समर्पण के माध्यम से भगवान को प्राप्त कर सकता है। यह बात शहर के बस स्टैंड के समीप स्थित गीता मानस भवन में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भागवत भूषण पंडित अरविंद व्यास ने कही। उन्होंने गजेंद्र मोक्ष का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक बार गजेंद्र नामक हाथी तालाब में स्नान कर रहा था, तभी एक ग्राह ने उसका पैर पकड़ लिया। गजेंद्र ने काफी प्रयास किया और आसपास मौजूद जीवों से सहायता की पुकार लगाई, लेकिन जब कोई उसकी सहायता नहीं कर सका तो उसने स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया। उसकी सच्ची पुकार और समर्पण पर भगवान ने उसकी रक्षा की। इस प्रसंग से स्पष्ट होता है कि भगवान की प्राप्ति के लिए केवल सच्ची भावना और पूर्ण समर्पण आवश्यक है।

समुद्र मंथन और वामन अवतार का सुनाया प्रसंग

कथा के दौरान पंडित व्यास ने समुद्र मंथन का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि समुद्र मंथन में एक ओर देवता और दूसरी ओर राक्षस थे। मंथन के दौरान भगवान ने मोहिनी अवतार धारण कर देवताओं को अमृत पान कराया। इसके साथ ही उन्होंने भगवान वामन अवतार की कथा भी सुनाई। उन्होंने बताया कि भगवान वामन ने राजा बलि से संकल्प कराकर तीन पग भूमि दान में मांगी। इसके बाद भगवान ने अपने विराट स्वरूप से पहले पग में पृथ्वी, दूसरे पग में आकाश को नाप लिया। तीसरे पग के लिए राजा बलि ने स्वयं को समर्पित कर दिया। भगवान ने राजा बलि को सुतल लोक का राजा बनाया और स्वयं उसके द्वारपाल बन गए। कथा के इस प्रसंग से श्रद्धालुओं को दान, वचन और समर्पण का महत्व बताया गया।

मन ही बंधन और मुक्ति का कारण

भागवत भूषण पंडित अरविंद व्यास ने कहा कि मन ही मनुष्य के बंधन और मुक्ति का कारण बनता है। जब मन संसार और माया में आसक्त हो जाता है तो वही बंधन का कारण बनता है, जबकि संसार की आसक्ति से मुक्त होकर परमात्मा की ओर केंद्रित मन मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने देवहूति और भगवान कपिल के संवाद का वर्णन करते हुए बताया कि देवहूति ने भगवान कपिल से पूछा कि संसार में सच्चा सुख कहां है। भगवान कपिल ने बताया कि सच्चा सुख बाहरी संसार में नहीं, बल्कि आत्मा में है। आत्मा और परमात्मा का मिलन ही वास्तविक आनंद है। उन्होंने कहा कि इंद्रियों को नियंत्रित करने के लिए संयम आवश्यक है। आसन, प्राणायाम, ध्यान, प्रत्याहार, धारणा, समाधि और नियम के माध्यम से मनुष्य अपने मन और इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त कर सकता है तथा आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ सकता है।

भगवान राम और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में झूमे श्रद्धालु

बुधवार को कथा स्थल पर भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। भगवान के जन्म की झांकी सजाई गई, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया। भजन-कीर्तन के बीच कथा स्थल भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारे लगाए।

आज लगेगा छप्पन भोग, होगा गोवर्धन पूजन

यजमान केएन आचार्य, ईश्वर जोशी एवं देवेंद्र जोशी के परिवार ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिवस भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा और गोवर्धन प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया जाएगा। इस अवसर पर गोवर्धन पूजन का महत्व भी श्रद्धालुओं को बताया जाएगा। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक बस स्टैंड के समीप स्थित गीता मानस भवन में किया जा रहा है।


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