भुजरिया जुलूस में चंपालाल यादव ने बढ़ाया सम्मान का हाथ . किन्नर समाज का पुष्पमाला से स्वागत किया


सीहोर राजधानी भोपाल में भोपाल भुजरिया जुलूस में इस बार आस्था और परंपरा की ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने लोगों का ध्यान खींचा। किन्नर समाज की ओर से निकाले गए पारंपरिक भुजरिया जुलूस में सीहोर नागरिक सहकारी बैंक के पूर्व संचालक एवं समाजसेवी नेता चंपालाल यादव ने आगे बढ़कर समाज के सदस्यों का भोपाल पहुंचकर पुष्पमालाओं से स्वागत और सम्मान किया।

सम्मान की यह पहल किन्नर समाज के सदस्यों के लिए भावुक कर देने वाला पल बन गई। पुष्पमाला पहनाए जाने के दौरान चेहरों पर खुशी और अपनत्व का भाव साफ नजर आया। गुरुजनों ने यादव के इस व्यवहार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि बिना किसी भेदभाव के सम्मान का हाथ बढ़ाना दिल को छू जाता है।

बोले यादव- हर व्यक्ति को मिले गरिमा के साथ सम्मान

चंपालाल यादव ने कहा कि समाज की असली खूबसूरती इसी में है कि हर व्यक्ति को उसके अस्तित्व और गरिमा के साथ स्वीकार किया जाए। भारतीय संस्कृति सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और सम्मान देने की सीख देती है।

उन्होंने कहा, “भुजरिया केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता की पहचान है। किन्नर समाज भी हमारी सांस्कृतिक विरासत का सम्मानित हिस्सा है। उन्हें सम्मान देना हमारी संस्कृति और मानवीय मूल्यों का सम्मान करना है।

गुरुजनों ने कहा- सम्मान की यह भावना दिल में रहेगी

यादव के आत्मीय व्यवहार से किन्नर समाज के गुरुजन भी अभिभूत नजर आए। उन्होंने कहा कि समाज में कई बार लोग सामने से गुजर जाते हैं, लेकिन जब कोई व्यक्ति बिना भेदभाव के हाथ बढ़ाकर सम्मान देता है, तो वह पल यादगार बन जाता है।

गुरुजनों ने कहा कि “यह हमारे लिए सिर्फ पुष्पमाला नहीं, बल्कि अपनत्व और बराबरी का एहसास है। चंपालाल यादव ने जिस आत्मीयता से स्वागत किया, वह सम्मान हमेशा याद रहेगा।

प्रदेश में खुशहाली और किसानों की समृद्धि की कामना

भुजरिया जुलूस के दौरान किन्नर समाज ने प्रदेश में अच्छी बारिश, खेतों में हरियाली, किसानों की समृद्धि और जन-जन के सुख की कामना की। चंपालाल यादव ने भी प्रदेश में पर्याप्त वर्षा, अन्नदाता किसानों के घर खुशहाली और हर परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना की।

एक माला, लेकिन संदेश बहुत बड़ा

भुजरिया जुलूस में हुआ यह सम्मान कुछ पलों का दृश्य था, लेकिन इसका संदेश व्यापक रहा। पुष्पमाला के माध्यम से सम्मान, बराबरी और इंसानियत की भावना सामने आई। इस पहल ने यह संदेश दिया कि सामाजिक दूरी कम करने के लिए बड़े मंच या औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच और सम्मान से बढ़ा हुआ एक हाथ ही काफी है।

- सम्मान की माला बनी अपनत्व की पहचान

भुजरिया जुलूस में चंपालाल यादव द्वारा किन्नर समाज के सदस्यों का सम्मान लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। गुरुजनों ने कहा कि समाज में सम्मान पाने की इच्छा हर व्यक्ति के मन में होती है। जब सम्मान बिना किसी भेदभाव और पूरी आत्मीयता के साथ मिलता है, तो वह लंबे समय तक दिल में रहता है। इस अवसर पर हुई पहल ने सामाजिक समरसता और मानवीय संवेदनाओं का संदेश दिया।


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