सीहोर। भगवान शिव की आराधना करने वाला भक्त कभी दुखी नहीं रहता। भगवान भोलेनाथ हर भक्त की सुनते हैं। भोले की भक्ति में शक्ति होती है। भगवान भोलेनाथ कभी भी किसी भी मनुष्य की जिंदगी का पासा पलट सकते हैं। बस भक्तों को भगवान भोलेनाथ पर विश्वास करना चाहिए और उनकी प्रतिदिन आराधना करनी चाहिए। उक्त विचार जिला मुख्यालय के समीपस्थ प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम पर आन लाइन शिव महापुराण के अंतिम दिवस अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे। आन लाइन कथा में श्रद्धालुओं की भारी आस्था देखने को मिली। कथा से जुड़ने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती रही, वहीं कुबेरेश्वरधाम में पहुंचे भक्तों के लिए सेवा कार्यों का भी विशेष आयोजन किया गया। आयोजन के दौरान 80 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी का वितरण किया गया।
कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ईश्वर की प्राप्ति बालपन जैसी सरल, निष्कपट और निर्मल भक्ति से होती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार ही फल की प्राप्ति होती है, इसलिए जीवन में सद्कर्म, सत्य और सेवा का मार्ग अपनाना चाहिए। उन्होंने कुबेरेश्वरधाम को श्रद्धालुओं के लिए पवित्र स्थल बताते हुए कहा कि यह आज करोड़ों लोगों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है।
मंगलवार को कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने कहा कि भगवान की भक्ति में छल, कपट और अहंकार का कोई स्थान नहीं है। भक्त का हृदय जितना सरल होगा, वह उतना ही भगवान के निकट पहुंचेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान शिव पर अटूट विश्वास रखने और धर्म, संस्कार एवं मानव सेवा को जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
वहीं पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने प्रवचन में भगवान शिव के भक्त की पहचान बताते हुए कहा कि भगवान के भक्त की तीन निशानी होती है मस्तक पर त्रिपुंड, गले में रुद्राक्ष और मुख पर शिव नाम। उन्होंने कहा कि ये केवल बाहरी प्रतीक नहीं, बल्कि भक्त के भीतर बसे शिवत्व, श्रद्धा और समर्पण के भाव के प्रतीक हैं। जीवन में गुरु का डर और गुरु का द्वार दोनों होना चाहिए। गुरु का सम्मान, अनुशासन और मार्गदर्शन मनुष्य के जीवन को सफल बनाने में सहायक होता है। गुरु ही भक्त को सही मार्ग दिखाकर उसे भक्ति, ज्ञान और मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।


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