सीहोर। शहर के कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर सम्मान समारोह समिति के तत्वाधान में रविवार को कार्यक्रम की शुरूआत विद्यार्थियों के सम्मान के साथ की गई। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष संत माधवदास महाराज ने कहाकि कन्याओं की शिक्षा ही समाज के उत्थान का माध्यम है।
उन्होंने कहाकि कन्याओं की शिक्षा मात्र एक व्यक्तिगत अधिकार नहीं, बल्कि एक संपूर्ण समाज के उत्थान, सशक्तिकरण और समृद्धि की सबसे मजबूत आधारशिला है। संतों और विचारकों का हमेशा से मानना रहा है कि शिक्षित नारी ही एक प्रबुद्ध और प्रगतिशील समाज का निर्माण कर सकती है। कार्यक्रम के दौरान सम्मान समारोह समिति की ओर से सुनील राय, मुन्न यादव आदि ने यहां पर मौजूद छात्राओं का सम्मान किया।
इस मौके पर समिति के अध्यक्ष संत माधवदास महाराज ने कहाकि भारतीय संस्कृति में आदिकाल से ही नारी को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। संतों की इस विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए, आधुनिक युग में बालिका शिक्षा के महत्व को वैश्विक स्तर पर मान्यता दी गई है। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में कक्षा एक से लेकर कक्षा बारहवीं तक के विद्यार्थियों का सम्मान किया जाएगा।
हर बेटी का शिक्षित होना जरूरी
उन्होंने कहाकि विद्यालय हो या खेल का मैदान। हॉबी हो या ज्ञान। सब चीजें एक इंसान के अंदर नहीं हो सकतीं। समाज में एक ही इंसान है जो एक साथ सब कुछ दे सकती है। वह है मां। नैतिकता व गुणों को एक इंसान में ढालना, सही तरीके से कब क्या करना चाहिए और क्या नहीं। यह बच्चों को कौन सिखाता है, उसकी मां। मां मेरी हो या आपकी। वह अपने समय की एक लड़की है। यही लड़की शिक्षित होकर मां के रूप में बच्चों को शिक्षित करती है। एक लड़की ही शिक्षित होकर मां बनकर बच्चे को एक अच्छे नागरिक के रूप में तैयार कर समाज, देश व राष्ट्र का निर्माण करती है। ऐसा तभी संभव है, जब बालिकाएं शिक्षित होंगी। बेहतर समाज का निर्माण करने के लिए हर बेटी का शिक्षित होना जरूरी है।

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