सीहोर,। गुरू की महिमा अपार है, उनका शिष्यों के प्रति प्रेम भी अवर्णनीय है। इस असार संसार में जिस किसी भी प्राणीमात्र का उद्धार हुआ है या जिनकी भी सदगति हुई है, वह केवल गुरूकृपा के कारण ही हुई है। गुरू की महत्ता और गुरू की कृपा दोनो अहेतु होते है यानि दोनों किसी कारण से नहीं होते है। गुरूकृपा असंभव को भी संभव बना देती है और शिष्य की लौकिक-पारलौकिक पीड़ाओं का हरण कर लेती है। हर व्यक्ति को गुरू के बताए रास्ते पर चलकर अपना कल्याण सुनिश्चित कर लेना चाहिए।
गुरूपूर्णिमा महाउत्सव पर उक्त आशय के उदगार प्रसिद्ध ब्रहमलीन संत श्रीश्री 1008 श्री त्यागी बाबा के कृपापात्र शिष्य मानस मर्मज्ञ सुप्रसिद्ध श्रीरामकथा वाचक श्रीश्री 1008 श्री उद्धवदास जी त्यागी महाराज द्वारा श्रद्धालुजनों के समक्ष व्यक्त किए गए। गुरूपूर्णिमा पर श्रीरामकुटी आश्रम सीहोर में ब्रहमबेला से ही कार्यक्रम प्रारंभ हो गए, जिनमें प्रातः गुरूपादुका पूजन एवं अभिषेक सम्पन्न हुआ, तत्पष्चात मानस प्रवचन एवं महाआरती का आयोजन किया गया। आज सुबह से ही आश्रम में गुरूचरणों की पूजा के लिए पूरे जिले भर के श्रद्धालुओं का तांता लगना प्रारंभ हो गया था। शिष्यों ने महाराजश्री की चरणपूजा की और उनका आर्षीवाद प्राप्त किया, इस अवसर पर नये शिष्यों ने भी बडी संख्या में गुरूनाम की दीक्षा ग्रहण की। इस अवसर पर दोपहर से शुरू हुआ विशाल भंडारा देर शाम तक चलता रहा जिसमें बडी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।
उल्लेखनीय है कि संतश्री त्यागी बाबा के सीहोर सहित आसपास के जिलों में प्रभु सीताराम जी को ईष्ट रूप में स्वीकार करने वाले बडी संख्या में शिष्य हैं। शहर के रेलवे स्टेषन रोड पर स्थित त्यागी बाबा आश्रम जिसे रामकुटी आश्रम के नाम से जाना जाता है यहां श्री सीताराम जी की मनमोहक प्रतिमाएं विराजमान है, आश्रम प्रांगण में श्री हनुमानजी, उमापति महादेव जी, मारकण्डेय महादेव की प्रतिमाएं मंदिर में विराजित हैं। आश्रम प्रांगण में एक कुंआ भी है जिसे संतश्री त्यागी बाबा ने अकेले ही श्रम करके निर्मित किया था। सीहोर में त्यागी बाबा आश्रम श्रद्धालुओं की एक चिरपरिचित स्थली है जहां जाने से ही तन-मन में परम शांति का अनुभव होता है। आश्रम के पवित्र वातावरण में अनेक बाल साधु भी हैं जो धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन एवं शिक्षा दीक्षा ग्रहण कर रहे हैं। प्रतिदिन यहां बडी संख्या में श्रद्धालु जनों का आना-जाना लगा रहता है। सुदूरवर्ती गांवों से भी भक्त संतश्री की समाधि का दर्शन करने आश्रम में आते हैं। आज भी संतश्री की समाधि से श्रद्धालुजनों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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