माँ का दूध शिशु की सुरक्षा का पहला टीका

सीहोर, 20 जुलाई, 2026  माँ का दूध शिशु की सुरक्षा का पहला टीका है। यह शिशु के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह आवश्यक पोषक तत्व से परिपूर्ण होता है साथ ही शिशु में रोग-प्रतिरोधक क्षमता के विकास में सहायक है। सही समय में और उचित अवधि तक स्तनपान शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में सहायक होगा।

   माताएं जन्म के 1 घंटे के भीतर नवजात शिशु को स्तनपान प्रारंभ कर दें। नवजात शिशु जन्म से पहले छः माह तक केवल स्तनपान कराया जाना चाहिए। इसके बाद ही पूरक आहार की शुरूआत की जानी चाहिये। शिशु के 2 वर्ष होने तक स्तनपान जारी रखना चाहिये। जन्म के 1 घंटे के भीतर स्तनपान की शुरुआत 41.3 प्रतिशत हुई है। यह एनएफएचएस-4 (2015-16) की तुलना में 6.9 प्रतिशत अधिक है। गर्भवती एवं धात्री माताओं को समुचित स्तनपान के लिए सहयोग प्रदाय किया जाता है एवं माताओं को दुग्ध दान के लिए प्रेरित किया जाता है। संग्रहित मानव दुग्ध, अस्पताल में भर्ती अत्यधिक कम वजन,प्रीमैच्युर एवं चिकित्सकीय जटिल नवजातों/अनाथ भर्ती शिशुओं के उपयोग में लाया जाता है। आगामी समय में मानव दुग्ध बैंक का चरणबद्ध रूप से प्रदेश में विस्तार किया जाएगा। ऐसी माताओं जिन्हें स्तनपान में कोई परेशानी है तो उन्हें एएनएम द्वारा अथवा निकटस्थ हेल्थ एण्ड वेलनेस क्लीनिक में सीएचओ द्वारा उपचार के लिये रेफर किया जाता है। स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए मैदानी अमले को सतत रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है।स्वास्थ्य संस्था में स्तनपान प्रोत्साहन से जुड़ी कमियों का आकलन, कमियों के निवारण के लिये संसाधन एवं उपलब्ध मॉनिटरिंग टूल का उपयोग, स्तनपान प्रोत्साहन हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार एवं सतत् निगरानी सुनिश्चित करना शामिल है।

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