सीहोर। सीवन अभियान की वरिष्ठ 85 वर्षीय सीवन पुत्री एवं समाजसेविका संपत बाई चौकसे का निधन हो गया। उनके निधन से सीवन परिवार सहित सामाजिक एवं धार्मिक क्षेत्र में शोक की लहर है। अभियान से जुड़े सभी सदस्यों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी सेवाओं को अविस्मरणीय बताया।

सीवन अभियान से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि संपत बाई चौकसे प्रारंभ से ही अभियान की प्रेरणास्रोत रहीं। वे सीवन पुत्र एवं सीवन योद्धाओं के लिए अपने हाथों से भोजन तैयार कर प्रेमपूर्वक खिलाती थीं। भीषण गर्मी में लगभग 45 डिग्री तापमान के बीच करीब 9 किलोमीटर पैदल चलकर हनुमान फाटक धाम पहुंचती थीं और अभियान से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करती थीं।


संपत बाई चौकसे का कहना था कि उन्हें पूरा विश्वास है कि सभी सीवन पुत्र और सीवन पुत्रियां मिलकर मां सीवन को उसके मूल स्वरूप में अवश्य स्थापित करेंगे और सीवन उद्धार का संकल्प पूरा होगा। वे अभियान के प्रत्येक चरण में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का कार्य करती रहीं।

उनके पुत्र लक्ष्मण चौकसे भी सीवन अभियान से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। सामाजिक सेवा और जनकल्याण के संस्कार उन्हें अपनी माता से ही मिले हैं। संपत बाई चौकसे जीवनभर सामाजिक, धार्मिक एवं मानव सेवा के कार्यों में अग्रणी रहीं। किसी भी जरूरतमंद की सहायता के लिए वे हमेशा सबसे पहले आगे आती थीं। मानव, जीव एवं प्रकृति सेवा के प्रति उनकी निष्ठा और सरल, दयालु व्यक्तित्व के कारण उन्हें समाज में विशेष सम्मान प्राप्त था। उनके उत्कृष्ट सामाजिक योगदान के लिए विभिन्न संगठनों द्वारा समय-समय पर सम्मानित भी किया गया।

सीवन पुत्र टीम के सदस्य प्रदीप चावड़ा ने बताया कि संपत बाई चौकसे की सीवन अभियान के प्रति समर्पित सेवाओं को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत "सीवन सम्मान" से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संपत बाई चौकसे का सेवा, समर्पण और मानवता का जीवन सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।