सीहोर/इछावर। अभ्युदय रिसर्च एंड सोशल डेवलपमेंट फाउंडेशन के तत्वावधान में तथा मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (एमपीसीएसटी), विज्ञान भवन, भोपाल के प्रायोजन से लाऊखेड़ी ग्राम पंचायत में तीन दिवसीय कार्यशाला "पराली से समृद्धि : स्वच्छ पर्यावरण और खुशहाल जीवन" का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में किसानों, महिलाओं, युवाओं एवं स्वयं सहायता समूहों को पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन, आधुनिक कृषि तकनीकों और पराली आधारित मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश कार्यालय प्रभारी डॉ. राजकुमार मालवीय ने कहा कि, "पराली को जलाना पर्यावरण के साथ-साथ किसानों की आर्थिक संभावनाओं को भी नुकसान पहुंचाता है। यदि इसका वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया जाए तो यह अतिरिक्त आय, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास का प्रभावी माध्यम बन सकती है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को नई तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं।"
तकनीकी विशेषज्ञ एवं मैनिट स्कॉलर डॉ. जीतेश जैन ने अपने व्याख्यान में पराली प्रबंधन की वैज्ञानिक पद्धतियों, मिट्टी की उर्वरता संरक्षण, हैप्पी सीडर, बेलर और श्रेडर जैसी आधुनिक मशीनों के उपयोग के साथ-साथ पराली से कम्पोस्ट, बायोचार, ब्रिकेट, पैकेजिंग सामग्री, डिस्पोजेबल उत्पाद तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं के निर्माण की तकनीकी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पराली को अपशिष्ट नहीं, बल्कि कृषि आधारित उद्योगों के लिए मूल्यवान कच्चे माल के रूप में अपनाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान अभ्युदय रिसर्च एंड सोशल डेवलपमेंट फाउंडेशन की अध्यक्षा शिखा खेड़ले ने पराली से तैयार विभिन्न उत्पादों एवं मशीनों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। इस अवसर पर तकनीकी सहायक देवेंद्र कनोजिया एवं सचेत ने प्रतिभागियों को मशीन संचालन, उत्पाद निर्माण प्रक्रिया और स्वरोजगार की संभावनाओं से अवगत कराया।
शिखा खेड़ले ने कहा, "पराली को लेकर किसानों की सोच बदलना समय की आवश्यकता है। यदि गांव स्तर पर इसके प्रसंस्करण और उत्पाद निर्माण की इकाइयां स्थापित हों तो ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।"
कार्यक्रम में ग्राम पंचायत लाऊखेड़ी के सरपंच धर्मेंद्र मालवीय, समाजसेवी शिवनारायण तोमर, पूर्व जनपद सदस्य सोभाल सिंह तथा राकेश जलवाया की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए इस प्रकार के नवाचार आधारित प्रयासों की सराहना की।
कार्यशाला में शामिल प्रतिभागी देवकरण प्रजापति ने कहा, "इस प्रशिक्षण से हमें पराली के महत्व की नई जानकारी मिली है। अब समझ आया कि इसे जलाने के बजाय खाद, बायो उत्पाद और अन्य उपयोगी सामग्री बनाकर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है। हम स्वयं भी इसका उपयोग करेंगे और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।"
कार्यक्रम का संचालन अभ्युदय रिसर्च एंड सोशल डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा किया गया। इसका प्रायोजन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (एमपीसीएसटी), विज्ञान भवन, भोपाल ने किया। कार्यशाला के आगामी सत्रों में प्रतिभागियों को पराली आधारित उत्पाद निर्माण और आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।

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