किसानों को रेज्ड बेड फरो एवं ब्रॉड बेड फरो पद्धति से सोयाबीन बुवाई हेतु किया जा रहा जागरूक


सीहोर, 18 जून, 2026    आगामी खरीफ मौसम में वर्षा की अनिश्चितता एवं बदलते मौसम के परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग द्वारा किसानों को सोयाबीन की बुवाई रेज्ड बेड फरो (Raised Bed Furrow) एवं ब्रॉड बेड फरो (Broad Bed Furrow) पद्धति से करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। कृषि विभाग के अमले द्वारा ग्राम स्तर पर किसानों को इन तकनीकों के लाभों की जानकारी दी जा रही है तथा खेतों पर प्रदर्शन के माध्यम से उनकी उपयोगिता समझाई जा रही है।

   कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को बताया जा रहा है कि कभी अत्यधिक वर्षा तो कभी अल्प वर्षा जैसी परिस्थितियों में रेज्ड बेड एवं ब्रॉड बेड फरो तकनीक फसल के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है। अधिक वर्षा होने पर खेत में जलभराव की समस्या उत्पन्न नहीं होती तथा अतिरिक्त पानी नालियों के माध्यम से आसानी से निकल जाता है। वहीं कम वर्षा की स्थिति में नालियों में नमी संरक्षित रहने से फसल को आवश्यक नमी उपलब्ध होती रहती है।

     इसी क्रम में भैरूंदा विकासखंड के एक प्रगतिशील किसान द्वारा सोयाबीन की बुवाई रेज्ड बेड फरो पद्धति से की गई है। किसान द्वारा इस तकनीक को अपनाकर अन्य कृषकों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। कृषि विभाग द्वारा ऐसे सफल प्रयासों को किसानों के बीच साझा कर उन्हें आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

   रेज्ड बेड पद्धति में फसल को ऊंची क्यारियों पर बोया जाता है तथा दोनों ओर नालियां बनाई जाती हैं, जिससे अतिरिक्त वर्षा जल का त्वरित निकास संभव हो पाता है। वहीं ब्रॉड बेड फरो पद्धति में चौड़ी क्यारियों एवं नालियों के माध्यम से जल प्रबंधन बेहतर होता है, जिससे पौधों की वृद्धि एवं विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्राप्त होता है।

     कृषि विभाग के अनुसार रेज्ड बेड एवं ब्रॉड बेड फरो तकनीक अपनाने से जलभराव से होने वाली फसल क्षति में कमी आती है, जड़ों का विकास बेहतर होता है, उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है, सिंचाई जल की बचत होती है तथा फसल में रोग एवं कीट प्रकोप की संभावना कम हो जाती है। इसके अतिरिक्त पौधों की समान वृद्धि होने से उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि की संभावना भी बढ़ जाती है।

   कृषि विभाग द्वारा किसानों से अपील की गई है कि वे खरीफ मौसम में सोयाबीन की बुवाई वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार रेज्ड बेड फरो अथवा ब्रॉड बेड फरो पद्धति से करें तथा अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करें।

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