सीहोर। खामलिया नरेला के किसानों ने आठ सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। नारेबाजी कर प्रदर्शन कर रहे किसानों का नेतृत्व करणी युवा सेना के जिलाध्यक्ष किसान कुलदीप सिंह राजपूत ने किया। तहसीलदार अमित सिंह को दिए ज्ञापन में कहा गया कि किसानों को आपस में सेटेलाईट सीमांकन लड़ा रहा है। किसानों की जमीनों को अदला बदला जा रही है। राजस्व रिकार्ड और पूराने जमीनों के नक् शों में फेर बदल किया जा रहा है। खसरा नम्बरों में अदला बदली कर किसानों की कीमती जमीनों को हड़पने की साजिश की जा रही है। गांवों में खतरनाक विवाद, तनाव एवं सामाजिक अशांति की स्थिति बन रही है।
किसान कुलदीप सिंह राजपूत ने बंटवारा राजस्व नक्शों में गड़बड़ी कराने के आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान में भूमि नक्शा एवं राजस्व रिकॉर्ड मौके की बास्तविक स्थिति से अत्यधिक भित्र त्रुटिपूर्ण है। गांव की अधिकांश भूमि का रिकॉर्ड मौके पर मेल नहीं खाता है। पूर्व में गांव के आसपास स्थायी सीमा चिन्ह बांदा/मिनारा एवं जरीब के माध्यम से बनाए गए थे। किन्तु अब सेटेलाईट के नक्शा शीट पुराने मैनुअल नक्शों से मेल नहीं खा रही है। जिसके कारण अधिकतर किसागों की भूमि एक-दूसरे के खेतों में दर्शाई जा रही है। जिसके कारण ग्राम में लगातार विवाद, तनाव एवं सामाजिक अशांति की स्थिति वनी हुई है।
किसानों की मांग है कि ग्राम खामलिया एवं नरेला में चल रही गलत एवं विवादित व्यक्तिगत भूमि नपती पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। पुराने मैनुअल नक्शों एवं वर्तमान नक्शा शीट का तकनीकी मिलान कराया जाए। स्थायी सीमा चिन्हों पुराने चिन्ह मिनारा चांदा के आधार पर पुन: निष्पक्ष सवे्र्र एवं बंदोबस्त कराया जाए।
जो व्यक्ति वर्षो से जिस भूमि पर काबिज रहता है अथवा खेती कर रहा है, उसकी वास्तविक कब्जा स्थिति को आधार मानकर नियमानुसार स्थायी समाधान किया जाए। राजस्व अधिकारियों एवं पटवारी को रिकॉर्ड सत्यापन किया जाए, उसके पश्चात ही सीमांकन की कार्यवाही की जाए। जिन परिवारों के पास आज तक आवासीय पट्टा नहीं है जो वर्षों से गांव में निवासरत हैं, उन्हें नियमानुसार आवासीय पट्टे प्रदान किए जाएं। ग्राम में बढ़ते भूमि विवादों के स्थायी निराकरण किया जाए।

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