विद्युत पोलों से किसान न बांधें पशु ग्रामीण इलाकों में बिजली से होने वाले हादसों का ग्राफ तेजी से बड़ा


    सीहोर l पशु किसान के परिवार के सदस्य जैसा होता है और उसकी आजीविका का मुख्य साधन भी होता है। मानसून की शुरुआत के साथ ही ग्रामीण इलाकों में बिजली से होने वाले हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ने लगता है। वर्तमान में चल रहे बारिश के दौर को देखते हुए जिले के उत्कृष्ट कृषक व पशुपालक थूना कला निवासी राजेश मेवाड़ा ने सभी किसान भाइयों और पशुपालकों से अपील की है कि कोई भी किसान भाई अनजाने में या लापरवाही वश अपने मवेशियों गाय, भैंस, बैल आदि को बिजली के खंभों विद्युत पोल या उनके सपोर्ट के लिए लगे अर्थिंग के तारों से बिल्कुल न बांधें।

बारिश के दिनों में लगातार पानी गिरने और हवा चलने के कारण बिजली के खंभों में खराबी आ जाती है। कई बार गीली मिट्टी और खंभे के आसपास जमा पानी के कारण अर्थिंग की समस्या पैदा हो जाती है, जिससे पूरे लोहे के पोल या सीमेंट के खंभों में भी करंट उतर आता है। कृषक राजेश मेवाड़ा ने बताया कि पशुओं की त्वचा संवेदनशील होती है और वे अक्सर गीली जमीन पर खड़े होते हैं, इसलिए मामूली सा करंट भी उनके लिए तुरंत जानलेवा साबित हो जाता है। हर साल लापरवाही के कारण सैकड़ों बेजुबान पशु इस तरह के हादसों में अपनी जान गंवा देते हैं।बारिश के दिनों में एक छोटी सी लापरवाही न सिर्फ एक बेजुबान की जान ले लेती है, बल्कि किसान को भारी आर्थिक और मानसिक संकट में भी डाल देती है। इसलिए इस बारिश के मौसम में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। 


किसान भाई अपने घरों या खेतों के आसपास मौजूद बिजली के खंभों से निश्चित दूरी पर ही पशुओं को बांधने की व्यवस्था करें। खंभे को सीधा रखने के लिए जमीन में धंसाए गए लोहे के तारों से भी पशुओं को दूर रखें l इनमें करंट आने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। यदि किसी बिजली के खंभे के पास पानी जमा है, तो वहां खुद भी न जाएं और न ही अपने बच्चों या मवेशियों को जाने दें। अगर किसी पोल में स्पार्किंग चिंगारी हो रही हो या करंट की आशंका हो, तो तुरंत इसकी सूचना बिजली विभाग के लाइनमैन या नजदीकी विद्युत कार्यालय को दें।


Post a Comment

0 Comments