जो भवसागर से पार लगाए जो तुम्हारी नैया को किनारे की तरफ खींच कर ले जाए जो इस काली काल में शिष्य को भगवान से जोड़ दे,वही संत है वही गुरु है वही साधु है उक्त उद्गार रामनगर कॉलोनी ग्राम दोराहा सीहोर म, प्र में चल रही सप्त दिवसीय श्री पुरुषोत्तममास शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस कथा व्यास परम गौभक्त क्रांतिकारी राष्ट्रीय संत पंडित मोहितरामजी पाठक सीहोर वालों ने व्यक्त किए आगे कथा में वर्णन करते हुए कहा कि संतों की पहचान जगत की भलाई करना है कंसों की पहचान मुक्ति की मलाई खाना है संत जगत की भलाई करता अपनी वाणी के द्वारा संसारीक प्राणी को शिव से जोड़ता है भगवान शिव की शरण में ले जाता है जो गुरु शिष्य को शिव से जोड़ दे भगवान से जोड़ने मंदिर से जोड़ दे गौशाला गाय से जोड़ दे वही व्यक्ति साधु है संत है गुरु है इसीलिए हम सब गुरु की शरण ग्रहण करते हो भगवान शिव जगत के गुरु, अपने भक्तों के लिए भगवान शंकर सब कुछ ईश्वर कर देते हैं जिस प्रकार भक्त कन्नाप्पा नयनार ने अपनी आंखें नेत्र भगवान शिव को अर्पण कर दिए इस छण भगवान शंकर ने प्रकट होकर उसको आशीर्वाद दिया और कहा कि जो भी सच्चे मन से मेरी पूजा करेगा अभिषेक करेगा दीप प्रचलित करेगा जो शिवालय जाएगा नंदी गाय की सेवा करेगा वहां मेरा परम भक्त होगा उसकी में सभी मनोकामनाएं पूर्ण करूंगा आज कथा के दौरान भगवान महाकाल का पाठ थी पूजन एवं अभिषेक संपूर्ण पंडाल एवं श्रोता यजमान परिवार द्वारा किया गया आज की कथा में चतुर्थ दिवस भगवान शिव एवं माता पार्वती का विवाह उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा आयोजक समस्त ग्राम वासी एवं क्षेत्रवासी ग्राम दोराहा निवेदक अग्रवाल परिवार ने संपूर्ण क्षेत्रवासी एवं ग्रामवासीयों से कथा में पधार रहे का धर्म लाभ लेने का आग्रह किया।

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