सीहोर। शहर के जयंती कालोनी परिसर में रविवार से होने वाले श्री 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ, प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव एवं श्रीराम कथा का श्रीगणेश शहर के जगदीश मंदिर से भव्य कलश यात्रा के साथ किया गया। इस मौके पर श्री-श्री 108 यज्ञ संचालक पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे के साथ बड़ी संख्या में साधु-संत और कथा वाचकों के साथ कलश धारण किए महिलाएं शामिल रही।
कलश यात्रा का शुभारंभ शानदार आतिशबाजी के साथ जगदीश मंदिर पर किया गया। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष रुद्रप्रकाश राठौर, यज्ञचार्य पंडित दीपक शास्त्री और पंडित अनिल शर्मा आदि शामिल थे। कलश यात्रा का अनेक स्थानों पर स्वागत किया गया। रविवार को भव्य कलश यात्रा, पंचाग पूजन, मंडप प्रवेश, जलाधिवास, राम रक्ष स्त्रोत और मानस सम्मेलन का आयोजन किया गया। सोमवार को देव स्थापना, अग्रि स्थापना, हवन अन्नाधिवास, मानस सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा और इसके अलावा राष्ट्रीय राम कथा व्यास मानस कोकिला महंत प्रज्ञा भारती वृंदावन के द्वारा कथा की जाएगी। इसके अलावा रात्रि को महाकाल मंडल के द्वारा राम लीला का मंचन किया जाएगा। महंत प्रज्ञा भारती ने कहाकि प्रभु को अपनी ओर खींचने के लिए अनन्य शरण आवश्यक है, अर्थात सांसारिक मोह को छोड़कर केवल उन्हीं पर निर्भर हो जाना। जब जीव स्वयं को असहाय मानकर पूरी श्रद्धा से प्रभु को पुकारता है, तब वे स्वयं आकर सहारा देते हैं।
मोह दुख की जड़ बनता
उन्होंने कहाकि हम भी दुनिया में आए, प्यार भी रखा, पर मोह नहीं रखना चाहिए। क्योंकि मोह दुख की जड़ बनता है। इस संसार और सांसारिक वस्तुओं से जितना भी मोह रखेंगे, वह अंतत: आपको दुख ही देगा। केवल धर्म ही आपका साथ देता है। मनुष्य के पूरे जीवन काल में और उसकी मृत्यु के बाद भी सिर्फ धर्म ही उसका साथ देता है। अंत समय में उसे सबको छोड़ना पड़ता है और उसे सब छोड़ देते हैं। उस समय भी उसका मित्र केवल धर्म ही होता है। नीति में कहा गया है कि जीवन का मित्र आहार, रूप का मित्र यौवन है, यौवन का मित्र पुरुषार्थ है, पुरुषार्थ का मित्र उपकार है, रोगी का मित्र वैद्य है और मरने वाले का मित्र धर्म है। इसलिए हमें यह समझ लेना चाहिए कि हमें इस संसारिक जीवन को मोह माया से दूर रखना चाहिए।

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