सीहोर, 07 मार्च, 2026 कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री बालागुरु के. द्वारा सीहोर जिले में खेतों में नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। जारी आदेशानुसार फसल कटाई के बाद अगली फसल की तैयारी के लिए कुछ किसानों द्वारा खेतों में आग लगाकर नरवाई नष्ट की जाती है, जिससे हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही इससे मिट्टी की उर्वरता भी कम होती है, सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं, जनसंपत्ति और प्राकृतिक वनस्पति को नुकसान पहुंचता है तथा आगजनी की घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। जिले में रोटावेटर जैसे वैकल्पिक साधन उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग कर खेत साफ किए जा सकते हैं। आदेश का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी।
जारी आदेशानुसार नरवाई जलाने पर पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है, जिसके तहत 02 एकड़ से कम भूमि वाले कृषकों पर 2500 रुपये प्रति घटना, 02 से 05 एकड़ तक भूमि वाले कृषकों पर 5000 रुपये प्रति घटना और 05 एकड़ से अधिक भूमि वाले कृषकों पर 15000 रुपये प्रति घटना पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में वसूले जाएंगे। कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने किसानों से अपील की है कि पर्यावरण संरक्षण एवं जनहित को दृष्टिगत रखते हुए नरवाई न जलाएं और नरवाई प्रबंधन के वैकल्पिक उपाय अपनाएं।
नरवाई नही जलाने के लिए किसानों को किया जा रहा जागरूक
कलेक्टर श्री बालागुरू के. के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को नरवाई प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस संबंध में कृषि विभाग के अमले द्वारा गांव-गांव में लाउडस्पीकर के माध्यम से किसानों को समझाइश दी जा रही है कि वे फसल अवशेष (नरवाई) को जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीकों से उसका प्रबंधन करें। साथ ही किसानों को नरवाई प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों की जानकारी भी दी जा रही है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहे, पर्यावरण प्रदूषण से बचाव हो और कृषि उत्पादन भी अधिक हो। कृषि विभाग द्वारा किसानों से अपील की जा रही है कि वे नरवाई न जलाएं और बताए गए वैकल्पिक उपायों को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
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