आगामी 19 अपै्रल से आरंभ होगा भव्य श्री 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ और हनुमान मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव


सीहोर। शहर के बस स्टैंड स्थित श्री हनुमान मंदिर समिति एवं समस्त क्षेत्रवासी के तत्वाधान में बालाजी की तर्ज पर निर्मित हनुमान मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। गुरुवार को नवनिर्मित मंदिर परिसर में यज्ञ संचालक धर्म रक्षक पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे बाबा और मंदिर समिति के अध्यक्ष रुद्र प्रकाश राठौर मंदिर के पुजारी अनिल शर्मा के अलावा सभी क्षेत्रवासियों ने यहां पर आगामी दिनों में होने वाले दिव्य अनुष्ठानों से संबंधित पोस्टर का विमोचन किया। इस मौके पर संस्कार मंच संरक्षक मनोज दीक्षित मामा सहित बड़ी संख्या में समिति के श्रद्धालु शामिल थे।

शहर के मुख्य बस स्टैंड पर स्थित श्री हनुमान मंदिर एक प्रसिद्ध मंदिर है, जहाँ करोड़ों की लागत से भव्य मंदिर का निर्माण पूर्ण हो रहा है। यहां मेहंदीपुर बालाजी की तर्ज पर हनुमान जी की दिव्य प्रतिमा स्थापित है, जो स्थानीय भक्तों के लिए अटूट आस्था का केंद्र है। इस मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना और प्रसादी का वितरण आयोजित होते हैं।

यज्ञ संरक्षक पंडित श्री कटारे और समिति के अध्यक्ष श्री राठौर ने बताया कि मेहंदीपुर बालाजी मंदिर भगवान हनुमान हिंदू देवता जिन्हें संकट मोचन माना जाता इसी का रूप अब करोड़ों रुपए की लागत से शहर के बस स्टैंड पर श्री सिद्ध हनुमान मंदिर प्रसिद्ध होने जा रहा है। करीब पांच करोड़ से बनाए जाने वाले हनुमान मंदिर में 2026 में राजस्थान से लाखों रुपए से मंगाई गई जहां पर हनुमान जी के साथ ही भगवान राम दरबार, भगवान शिव-नंदी और सप्तऋषियों की प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर देश भर के प्रसिद्ध संतों का समागम होगा। 19 अपै्रल को प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

 मंदिर की सात दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन पर किया जाएगा। जनवरी तक मंदिर परिसर पूर्ण हो जाएगा, इसके उपरांत सात दिवसीय भव्य प्राण-प्रतिष्ठा के लिए प्रसिद्ध धर्म आचार्यों की उपस्थित में भव्य आयोजन को पूर्ण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे ब्रह्मलीन पिता श्री द्वारा करीब 232 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जा चुका है और हमारे द्वारा भी अब तक 88 से अधिक मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी है और करीब 12 मंदिर निर्माणाधीन है। इन मंदिरों में शहर का हनुमान मंदिर करीब 60 वर्ष पूर्व ब्रह्मलीन सूरदास महाराज मनोहर दास द्वारा निर्मित किया गया था, जो दयनीय स्थिति में था, लेकिन अब राजस्थान से मंगवाए पत्थरों की नक्काशी से मंदिर अपने दिव्य स्वरूप में झलक रहा है। हमारा उद्देश्य हिंदू समाज को मजबूत करना है।


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