कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति अटूट समर्पण और भक्ति का प्रतीक पूरे माह शिव भक्त सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम की 11 किलोमीटर की यात्रा करेंगे



सीहोर। हर साल की तरह इस साल भी शहर के सीवन नदी के तट से हर रोज हजारों की संख्या में कांवड़ यात्री पूरी आस्था और उत्साह के साथ नंगे पैर कंधे पर कांवड लेकर प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम पर पहुंच रहे है। करीब 11 किलोमीटर की लंबी यात्रा पर अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं को निशुल्क पेयजल, नाश्ते, केले और फलहारी मिक्चर आदि का वितरण किया जा रहा है। शहर के इंदौर नाका, डी मार्ट के पास, श्रीराधेश्याम कालोनी और सोया चौपाल पर श्रद्धालुओं के लिए पंडाल की व्यवस्था की गई है। विठलेश सेवा समिति के समीर शुक्ला और पंडित विनय मिश्रा आदि सेवा कार्य में लगे हुए है।

जिला संस्कार मंच के मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि पूरे सावन के माह में श्रद्धालुओं के द्वारा शहर के सीवन घाट से कुबेरेश्वरधाम तक अल सुबह से देर रात्रि तक श्रद्धालु मार्ग से गुजर रहे है। कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति अटूट समर्पण और भक्ति का प्रतीक है। कांवड़ को कंधे पर रखकर चलना, भक्तों के लिए एक तरह की तपस्या है। इस दौरान भक्त शारीरिक कष्ट सहते हैं, लेकिन उनके मन में भगवान शिव के प्रति आस्था जरा सी भी कम नहीं होती है। इससे ये भी पता चलता है कि साधक शिव जी के लिए किसी भी कठिनाई का सामना करने के लिए तैयार हैं। कांवड लेकर गुजरात से आए एक परिवार ने बताया कि वह पहली बार कांवड यात्रा कर रहे है। अपने दोनों बेटे और बेटियों के साथ करीब 11 किलोमीटर आस्था के साथ उन्होंने यात्रा की। 


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