सीहोर। जिस देश में सिंहासन पर खड़ाऊ पादुकाएं राज करती हैं उसे देश को भारत कहते हैं भगवान श्री राम की पादुकाएं श्री भरत लाल जी वन लेकर लोट उन्ही पादुकाओं ने अयोध्या की राजगादी पर विराजमान होके 14 वर्ष अयोध्या का राज पाठ चलाया उक्त उद्गार दोराहा की पावन भूमि पर श्रीपाल वाले बाबा हनुमान मंदिर प्रांगण में चल रही नव दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के पूर्ण आहुति के पावन अवसर पर कथा व्यास क्रांतिकारी वक्ता गौभक्त संत पंमोहितरामजी पाठक ने व्यक्त किए आगे कथा में वर्णन करते हुए कहा कि भरत ने गुरु वशिष्ठ को भगवान राम के राज्यतिलक के लिए सभी देवी देवताओं को सन्देश भेजने की व्यवस्था करने को कहा। गुरु वशिष्ठ ने ये काम अपने शिष्यों को सौंप कर राज्यतिलक की तैयारी शुरू कर दीं।
ऐसे में जब राज्यतिलक में सभी देवी-देवता आ गए तब भगवान राम ने अपने अनुज भरत से पूछा चित्रगुप्त जी नहीं दिखाई दे रहे है, इस पर जब उनकी खोज हुई। खोज में जब चित्रगुप्त जी नहीं मिले तो पता लगा कि गुरु वशिष्ठ के शिष्यों ने भगवान चित्रगुप्त जी को निमत्रण पहुंचाया ही नहीं था, जिसके चलते भगवान चित्रगुप्त नहीं आये।
इधर भगवान चित्रगुप्त सब जान तो चुके थे, और इसे भी नारायण के अवतार प्रभु राम की महिमा समझ रहे थे। भगवान राम सबके प्राण प्रिय हैं शीघ्र उसका निदान कराया कथा के दौरान आज भगवान श्रीराम का राजतिलक हुआ घर घर दीप जलाए गए रामराज की स्थापना हुई हर सनातनी को भगवान श्री राम के चरित्र से प्रेरणा लेकर रामराज की स्थापना अपने हृदय और घर में करना चाहिए कथा के पश्चात यज्ञ की पूर्णआहुति एवं विशाल झंडा निकाला गया आयोजन समिति श्रीपाल वाले बाबा मंदिर ने कथा एवं यज्ञ में पधारने के लिए संपूर्ण क्षेत्र वासियों का आभार व्यक्त किया।



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